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निक्टालोपी को समझना: कारण, लक्षण और उपचार के विकल्प

निक्टैलोपी एक ऐसी स्थिति है जहां रोगी को रात में सोने में कठिनाई होती है और दिन में अत्यधिक नींद आती है। इसे रात्रिकालीन निद्रा विकार या निद्रा रोग के रूप में भी जाना जाता है।
Nyctalopy विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है जैसे:
1. स्लीप एपनिया: यह एक ऐसी स्थिति है जहां रोगी नींद के दौरान थोड़े समय के लिए सांस लेना बंद कर देता है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है और दिन में अत्यधिक नींद आने लगती है।
2. अनिद्रा: यह एक ऐसी स्थिति है जहां रोगी को सोने या सोते रहने में कठिनाई होती है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है और दिन में अत्यधिक नींद आती है।
3. रेस्टलेस लेग सिंड्रोम: यह एक ऐसी स्थिति है जहां रोगी को अपने पैरों में असहज अनुभूति का अनुभव होता है, जो उनकी नींद में खलल डाल सकता है और दिन में अत्यधिक नींद का कारण बन सकता है।
4. अवसाद: इससे नींद के पैटर्न में बदलाव हो सकता है और दिन में अत्यधिक नींद आ सकती है।
5. चिंता: इससे नींद के पैटर्न में बदलाव और दिन में अत्यधिक नींद आने की समस्या भी हो सकती है।
6. दवाएं: कुछ दवाएं जैसे शामक और अवसादरोधी दवाएं नींद के पैटर्न को बाधित कर सकती हैं और दिन में अत्यधिक नींद का कारण बन सकती हैं।
7. जीवनशैली के कारक: नींद की खराब आदतें, अनियमित नींद का शेड्यूल और सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन के संपर्क में आना निक्टैलोपी में योगदान कर सकता है। निक्टैलोपी के लक्षणों में शामिल हैं:

* रात में सोने में कठिनाई होना
* रात में बार-बार जागना
* जागने पर थकान या सुस्ती महसूस होना
* दिन के दौरान जागते रहने में कठिनाई
* झपकी की बढ़ती आवश्यकता * मूड में बदलाव जैसे चिड़चिड़ापन, चिंता, या अवसाद

निक्टैलोपी का उपचार अंतर्निहित कारण पर निर्भर करता है और इसमें शामिल हो सकते हैं:

1. जीवनशैली में बदलाव: नींद की आदतों में सुधार, नियमित व्यायाम और सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से परहेज करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
2. दवाएं: नींद में मदद करने वाली दवाएं, अवसादरोधी दवाएं और चिंता-विरोधी दवाएं जैसी प्रिस्क्रिप्शन दवाएं नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकती हैं।
3. व्यवहार थेरेपी: संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी) और विश्राम तकनीक जैसी तकनीकें निक्टैलोपी के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकती हैं।
4। नींद का अध्ययन: रात भर की नींद का अध्ययन अंतर्निहित नींद विकारों जैसे स्लीप एपनिया या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का निदान करने में मदद कर सकता है।
5. वैकल्पिक उपचार: एक्यूपंक्चर, मालिश और हर्बल सप्लीमेंट भी निक्टेलोपी के लक्षणों के प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं।

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